Login
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi adipiscing gravdio, sit amet suscipit risus ultrices eu. Fusce viverra neque at purus laoreet consequa. Vivamus vulputate posuere nisl quis consequat.
Create an accountLost your password? Please enter your username and email address. You will receive a link to create a new password via email.
गठिया के बारे में जागरूकता
सरल शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में गठिया का अरà¥à¤¥ है जोड़ों में सूजन। सूजन में दरà¥à¤¦, सूजन, लालिमा और उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर गरà¥à¤®à¥€ का अनà¥à¤à¤µ होता है। हडà¥à¤¡à¥€ के जोड़ का सूजन (ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤†à¤°à¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸) जिसमें जोड़ों में दरà¥à¤¦ का कारण सूजन नहीं होता है, के अलावा गठिया के कारण होने वाली अधिकांश बीमारियां सà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के कारण होती हैं। सà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ à¤à¤• अजेय रोग पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है जो हमारे सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की कोशिकाओं और रसायनों के कारण होती है, जो हमारे सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के जोड़ों पर हमला और नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाती रहती हैं। गठिया के कारण होने वाले इन सà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कà¥à¤·à¤¤à¤¿ को मोटे तौर पर रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल रोग कहा जाता है और इनकी पहचा रूमेटाइड अरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ है। रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल रोग किसी à¤à¥€ आयॠवरà¥à¤— को नहीं छोड़ता है। यह 2 साल की उमà¥à¤° में शà¥à¤°à¥‚ हो सकता है और यहां तक कि 80 साल की उमà¥à¤° के रोगी में à¤à¥€ पहली बार हो सकता है। रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ के के अंतरà¥à¤—त 300 से अधिक रोग पà¥à¤°à¤•ार हैं।
पà¥à¤°à¤•ार:
हम कà¥à¤› रोगों को आसानी से बताने के लिठसारणीबदà¥à¤§ करेंगे:
Sl रोग का नाम आयॠलकà¥à¤·à¤£ नैदानिक परीकà¥à¤·à¤£
1 रियà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤‡à¤¡ आरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ 20-70 साल सà¥à¤¬à¤¹ की जकड़न के साथ हाथों के छोटे जोड़ों का दरà¥à¤¦ और सूजन
और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡, कोहनी और कंधों जैसे बड़े जोड़ों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कर सकता है और यदि अनà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¤ हो तो हाथों की विकृति हो सकती है। पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ लकà¥à¤·à¤£ + बà¥à¤¾ हà¥à¤† ईà¤à¤¸à¤†à¤°, सीआरपी और पॉजिटिव रूमेटोइड फैकà¥à¤Ÿà¤° या à¤à¤‚टी सीसीपी à¤à¤¬à¥€
2 à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस 15–40 साल आमतौर पर पà¥à¤°à¥à¤· पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं। पीठके निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में रात के दूसरे à¤à¤¾à¤— में लंबे समय तक आराम करने से दरà¥à¤¦ होता है और बाद और गतिविधियां करने से उसमें सà¥à¤§à¤¾à¤° होता है। अकà¥à¤¸à¤° कà¥à¤› बड़े जोड़ों में दरà¥à¤¦ और सूजन होती है और कà¥à¤› को आंखों के लाल होने शिकायत हो सकती है। सैकà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤²à¤¿à¤¯à¤• जोड़ का à¤à¤•à¥à¤¸ रे में सूजन दिखाती है + à¤à¤• आनà¥à¤µà¤‚शिक परीकà¥à¤·à¤£ होता है जिसे à¤à¤šà¤à¤²à¤ बी27 कहा जाता है जो 90% रोगियों में सकारातà¥à¤®à¤• होती है। ईà¤à¤¸à¤†à¤° और सीआरपी की मातà¥à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ अधिक हो सकती है।
3 फाइबà¥à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤¯à¤²à¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ 20-50
साल
लगà¤à¤— महिलाà¤à¤‚ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होती हैं और वे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° पूरे शरीर में लगातार पीड़ा और दरà¥à¤¦ की शिकायत करती हैं। अकà¥à¤¸à¤° अवसाद, मन नहीं लगने, अधूरी नींद और माइगà¥à¤°à¥‡à¤¨ जैसे सिरदरà¥à¤¦ से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ होता है। कोई à¤à¥€ नैदानिक परीकà¥à¤·à¤£ उपलबà¥à¤§ नहीं है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लगà¤à¤— सà¤à¥€ परीकà¥à¤·à¤£ परिणाम सामानà¥à¤¯ आते हैं। नैदानिक नेतà¥à¤° (कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤¿à¤•ल आइ) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पहचान की जाती है ।
4 पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€à¤—त लà¥à¤¯à¥‚पस à¤à¤°à¤¿à¤¥à¥‡à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤¸à¤¸ [à¤à¤¸à¤à¤²à¤‡] 2-40 साल à¤à¤• बहà¥à¤…ंग रोग जिसमें चेहरे पर चकतà¥à¤¤à¥‡, सूरज की रौशनी की वजह से चकतà¥à¤¤à¥‡, जोड़ों में दरà¥à¤¦, खून की कमी, गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ में खराबी, फेफड़े और हृदय की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हों जाती है। नैदानिक निदान अकà¥à¤¸à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ ही होता है। à¤à¤à¤¨à¤, à¤à¤‚टी डीà¤à¤¸ डीà¤à¤¨à¤ à¤à¤‚टीबॉडी जैसे रकà¥à¤¤ परीकà¥à¤·à¤£ सकारातà¥à¤®à¤• रहते हैं। दीरà¥à¤˜à¤•ालिक सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इसका उपचार किया जाता है।
5 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¶à¥€à¤² गठिया 16-50 साल à¤à¤• या दो बड़े जोड़ों, विशेष रूप से घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ और टखनों का दरà¥à¤¦ और सूजन,जो à¤à¤• वायरल या जीवाणॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ के बाद 3 दिनों से 3 महीने के à¤à¥€à¤¤à¤° विकसित होते हैं और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ में सीमित होता है। कोई विशिषà¥à¤Ÿ नैदानिक परीकà¥à¤·à¤£ उपलबà¥à¤§ नहीं हैं। ईà¤à¤¸à¤†à¤° और सीआरपी मूलà¥à¤¯ अधिक हो सकता है। कà¥à¤› रोगियों में à¤à¤šà¤à¤²à¤ बी27 आनà¥à¤µà¤‚शिक परीकà¥à¤·à¤£ सकारातà¥à¤®à¤• पाठजाते हैं।
6 गाउट 50 साल याठउससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾  आमतौर पर बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में होती है और तीवà¥à¤° या पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ हो सकती है। तीवà¥à¤° गाउट बड़े पैर के अंगà¥à¤²à¥€ के गोलों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है जो बेहद सूजन वाला, लाल और दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• हो सकता है और बà¥à¤–ार à¤à¥€ हो सकता है। यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ का रकà¥à¤¤ सà¥à¤¤à¤° निदान में मदद नहीं करता है और यह हमले के दौरान सामानà¥à¤¯ हो सकता है। माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोप के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जोड़ो से निकाले गठफà¥à¤²à¥‚ड के परीकà¥à¤·à¤£ से यूरिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤² का पता चल सकता है।
कौन से लोग जोखिम में हैं?
वासà¥à¤¤à¤µ में सà¤à¥€ रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल रोग à¤à¤• से अधिक जीन के कारण होते हैं। वासà¥à¤¤à¤µ में इस बीमारी के लिठसैकड़ों जीन जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° होते हैं और माता-पिता में बीमारी होने से उनके बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¥€ होने का फोरà¥à¤®à¥à¤²à¤¾ यहां लागू नहीं होता है। लेकिन परिवार में à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलोसिस, सोरियाटिक आरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ और रूमेटाइड आरà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ जैसी बीमारियाठअकà¥à¤¸à¤° चलती हैं।
जो लोग धूमà¥à¤°à¤ªà¤¾à¤¨ करते हैं या उचà¥à¤š पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ वाले à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाते हैं जिनमें संतृपà¥à¤¤ वसा विशेष रूप से होती है, और सà¥à¤®à¥‹à¤•à¥à¤¡ खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ खाते हैं, यह उनमें à¤à¤• पूरà¥à¤£ तरह से सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ बीमारी का à¤à¤• विनाशकारी परिणाम विकसित करता है जिसमें अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• दरà¥à¤¦, उपचार के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सà¥à¤¸à¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और तà¥à¤µà¤°à¤¿à¤¤ रूप से जोड़ों को नà¥à¤•सान और कà¥à¤°à¥‚पता का पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• विकास होता है।
उपचार
उपचार का सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हिसà¥à¤¸à¤¾ शारीरिक थेरेपी और गतिशील वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® है। जोड़ों के बीच रिकà¥à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में मौजूद दà¥à¤°à¤µ या तरल पूरे दिन सामानà¥à¤¯ रूप से परिचालित होता रहता है और रकà¥à¤¤ के अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ फिलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ से जोड़ों का ताजा दà¥à¤°à¤µ बनता रहता है। à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जितना अधिक सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ होता है उतना अधिक वहां संचलन होता है और जोड़ों से हानिकारक रसायन निकल जाते हैं। इससे जोड़ों का नà¥à¤•सान कम होता है।
सबसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ दवा जो सà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ सूजन के किसी à¤à¥€ रूप को दबाती है वह सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ नà¥à¤•सान की जगह पर तेजी से कारà¥à¤¯ करता है और दरà¥à¤¦ से बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ राहत दे सकता है। अधिकांश रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल रोगों में सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ का उपयोग कम अवधि और कम खà¥à¤°à¤¾à¤• में किया जाता है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ की उचà¥à¤š खà¥à¤°à¤¾à¤• रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल आपात सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में उपयोग की जाती है। सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ के लगातार उपयोग से उचà¥à¤š रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ के विकास या बिगड़ने, पेट के अलà¥à¤¸à¤°, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥‹à¤°à¥‹à¤¸à¤¿à¤¸, शरीर की सूजन आदि के रूप में हो सकता है।
दवाओं का अगला समूह कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤• दरà¥à¤¦ निवारक है जिसे à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€ के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है। उनका उपयोग छोटी अवधि के लिठकिया जाता है, लेकिन à¤à¤‚किलोसिंग सà¥à¤ªà¥‹à¤‚डिलाईसिस जैसी बीमारियों को à¤à¤¨à¤à¤¸à¤à¤†à¤ˆà¤¡à¥€ के साथ दीरà¥à¤˜à¤•ालिक उपचार की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पेट में अलà¥à¤¸à¤°, गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की कà¥à¤·à¤¤à¤¿ और हृदय संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हैं।
दवाओं के अगले सेट को रोग को बदलने वाले रूमेटाइड पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ दवाà¤à¤ या डीà¤à¤®à¤à¤†à¤°à¤¡à¥€à¤à¤¸ कहा जाता है। मेथोटà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤¸à¥‡à¤Ÿ [फोलिक à¤à¤¸à¤¿à¤¡ के साथ], सलà¥à¤«à¤¾à¤¸à¤¾à¤²à¤œà¥€à¤¨, हाइडà¥à¤°à¥‹à¤•à¥à¤¸à¥€à¤•à¥à¤²à¥‹à¤°à¥‹à¤•à¥à¤µà¥€à¤¨ सलà¥à¤«à¥‡à¤Ÿ, मिनोसाइकà¥à¤²à¤¿à¤¨ और लेफà¥à¤²à¥à¤¨à¤¾à¤®à¤¾à¤‡à¤¡ को सामूहिक रूप से सिंथेटिक डीà¤à¤®à¤à¤†à¤°à¤¡à¥€à¤à¤¸ [à¤à¤¸à¤¡à¥€à¤à¤®à¤à¤†à¤°à¤¡à¥€] कहा जाता है। वे रोग को संशोधित करते हैं और रोग की पà¥à¤°à¤—ति को रोकते हैं। वे विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल रोगों विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ संयोजनों में उपयोग किठजाते हैं। उनके पास पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होते हैं और इसलिठहीमोगà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤¿à¤¨, रकà¥à¤¤ की गणना, जिगर और गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ की कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ अंतराल निगरानी आवशà¥à¤¯à¤• है।
दवाओं के सबसे उनà¥à¤¨à¤¤ समूह को जैविक डीà¤à¤®à¤à¤†à¤°à¤¡à¥€ या केवल जैविक कहा जाता है। वे महंगे अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• सटीक सà¥à¤ˆ होते हैं जो विशेष रूप से जोड़ों को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाने वाले आकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रसायनों को लकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करते हैं और दबाते हैं। वे उपचार के लिठउतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ होते हैं और लोगों में इस तरह के सà¥à¤ˆ का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ लाठहोता है। उनके काफी अलग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ूल पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ होते हैं जैसे कि तपेदिक, हेपेटाइटिस या कà¥à¤› नà¥à¤¯à¥‚रोलॉजिकल कà¥à¤·à¤¤à¤¿ जैसे गंà¤à¥€à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का होना। दवा को शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले किसी à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में छिपे हà¥à¤ तपेदिक, हेपेटाइटिस या à¤à¤šà¤†à¤ˆà¤µà¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ को समापà¥à¤¤ करना समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है। इसके अलावा, इस थेरेपी को शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले à¤à¤• मरीज को टीके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रोके जा सकने वाले रोगों से बचाव के लिठटीका लगाना à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के तेजी से और लगातार कà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अधिकांश रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल विकारों का अचà¥à¤›à¥€ तरह से इलाज किया जा सकता है। उपचार का सार जलà¥à¤¦à¥€ पता लगाने में निहित है। अधिकांश रà¥à¤®à¥‡à¤Ÿà¥‹à¤²à¥‰à¤œà¤¿à¤•ल विकारों में सà¤à¥€ विशिषà¥à¤Ÿ नैदानिक लकà¥à¤·à¤£ नहीं दिखते हैं और न ही कोई पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ किया गया नैदानिक परीकà¥à¤·à¤£ है। इसलिठशà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ और सही निदान उपचार करने वाले चिकितà¥à¤¸à¤•ों की योगà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पर निरà¥à¤à¤° करता है। यह हमेशा फायदेमंद होता है कि कोई à¤à¥€ नà¥à¤•सान होने से पहले उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अवसà¥à¤¥à¤¾ में ही पकड़ ले और उनका उपचार करे। जिदगी जीने की संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ आयॠशायद ही कम होती है और जीवन की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ आमतौर पर उचित पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन से संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ रहती है।
| --------------------------- | --------------------------- |